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His Eye (Poem)

His eyes (poem)

His eyes
When he stared at me
Then I also looked at him
Don't know what it was like
I started to crush myself
Began to escape from his eyes

He was so interested in seeing me
Started being oblivious to the surroundings
I lost my eyes like this
I could not do anything I wanted
Immersed me in my own color

His eyes
Her eyes were like the depth of the sea
I felt like drowning
Felt like burning himself in this fire
He did some work in his eyes
Who started to revolt on his own
His eyes.

:—Afsana Wahid

His eyes (poem)

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Comments

peachy from Home Sweet Home on December 25, 2020:

very beautiful poem

Afsana Wahid (author) from Bareilly on December 25, 2020:

पुरानी कुछ यादें याद करने का मन किया तो अपनी पुरानी बुक्स निकाल कर बैठ गई उस के पन्ने पलट ना शुरू की है जैसे ही बुक की में बीच के पेजो तक पहुंची वहां एक पुरानी याद रखी हुई मिली एक पुराना  गुलाब

यह वह गुलाब था जो कॉलेज के लास्ट डे पर उसने मुझे दिया था और वह दिन मुझे अच्छे से याद है कुछ कहा नहीं उसने मगर फिर भी वह बहुत कुछ कह गया था उसकी वह उदासी भरी शक्ल आज भी मैं भूल नहीं पाती हूं उसका वह मुझसे यूं ही दूर चला जाना मुझे आज भी तड़पाता है जब मैं इस गुलाब को देखती हूं तो इस गुलाब की शक्ल में मुझे वह नजर आता है यू चला जाना उसका मेरी जिंदगी से मैंने कभी सोचा नहीं था वह बहुत पास था मेरे फिर भी दूर चला गया कुछ लोग जिंदगी में इस तरह मिलते हैं जो चले तो जाते हैं मगर उनकी याद हमेशा हमें रहती है मेरा बहुत अधूरा प्यार जिसका एहसास मुझे बाद में हुआ फिर कॉलेज खत्म होने के बाद वह दोबारा मुझे कहीं नहीं मिला बहुत कोशिश की मैंने उसे ढूंढने की फिर भी वह कहीं नजर नहीं

पता नहीं वह कॉलेज का लास्ट डे था या उसका मेरी जिंदगी में लास्ट डे था

मैं जब जब इस बुक को खोलती हूं और इस गुलाब को देखती हूं तो मुझे अपने उस के दरमियान की हुई कॉलेज की वह सारी बातें याद आती है वो उसका  आहिस्ता आहिस्ता बात करना उसका धीरे से मुस्कुराना 1 मिनट को मैं गुम हो जाते हो उसका वह आखिरी गुलाब मेरे पास हमेशा से है और हमेशा रहेगा

Afsana Wahid (author) from Bareilly on December 24, 2020:

उसकी नजर

जब उसकी नजर पड़ी मुझ पर

तब मेरी नजर भी पड़ी  उस पर

ना जाने ऐसा क्या था उसकी नजर में

मैं खुद में समेटने लगी

उसकी नजरों से बचने लगी

वह इस कदर मसरूर था मुझे देखने में

के आसपास से भी बेखबर होने लगा

मेरी आंखों में इस तरह खोने लगा

मैं चाह कर भी कुछ ना कर सकी

मुझे अपने ही रंग में डुबोने लगा

उसकी नजर

समंदर की गहराई जैसी थी उसकी नजर

मेरा डूब जाने का मन करने लगा

खुद को इस आग में जलाने का मन करने लगा

उसकी नजर में कुछ काम तो ऐसा कर दिया

जो खुद से ही बगावत करने का मन करने लगा

उसकी नजर

Hasnat Saeed from Wah Cantt,Punjab,Pakistan on December 24, 2020:

In the first stanza first u said his eyes then her eyes i'm confused and i wanna know did you write this on your own

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